Ram Ram ji

बेशक रावण महाज्ञानी और महाविज्ञानी था, सत्य तो यह है कि उसके समान ज्ञानी और विज्ञानी तो आज तक पैदा ही नहीं हुआ और न होगा—न भूतो न भविष्यति—परन्तु साहब—इन्द्रिय द्वार झरोखा नाना तहँ तहँ बैठे सुर करि थाना—जैसे वचनों का मर्म तो वह भी नहीं जानता था, यदि जानता भी था तो उसे मानता नहीं था, इसीलिये तो वह अपने जीवन की बगिया को ३३ कोटि देवताओं से सिंचवाता था, उनको ही अपने जीवन का भाग्य विधाता समझता था, उनकी नाव में आसीन होकर भव-सागर पार करना चाहता था, सो परिणाम क्या हुआ, भला कौन नहीं जानता है? क्या आप इससे अनभिज्ञ हैं? सत्य तो यह है कि हम सभी बहुत कुछ जानते हैं परन्तु मानते कुछ नहीं हैं l अन्यथा हमारी और हमारे देश की तस्वीर आज कुछ और ही होती l कोई बात नहीं—जब जागे तभी सबेरा—इस वर्ष को भूत लगने वाला है, आगामी वर्ष से ही जागने का प्रयास करें l
जय श्रीराम जय बजरंगबली

 

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