JAI SHREE RAM

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“प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।’ लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।

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“प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।’ लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।। Prema magana kausalya nisidina jata na jana. Suta… Read More →

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अस अभिमान जानि जनि भोरे—मुनि सुतीक्ष्ण की यह बानी l मैं सेवक रघुपति पति मोरे—बस यही टेक मन ने मानी ll किसी भी योनि में जन्म मिले, पर रहे न… Read More →

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जब लगि तुझ में तू रहे, तब लगि वह रस नाहिं l रज्जब आया अरपि दे, तो आवै हरि माँहिं ll जब तक मनुष्य असत *मैं* (अविद्या) का दास है… Read More →

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1—प्यारे यश-कीर्ति की भक्षक वासना आपको कभी उठने नहीं देगी तो कुल और वंश की यश-कीर्ति में वृद्धि करने वाली उपासना कभी गिरने नहीं देगी, सत्य तो यह है कि… Read More →

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